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'होर्मुज से सभी जहाजों को गुजरने देने के लिए तैयार हैं', ईरान के विदेश मंत्री अराघची का बड़ा बयान

 Edited By: Kajal Kumari @lallkajal
 Published : May 15, 2026 04:08 pm IST,  Updated : May 15, 2026 11:50 pm IST

ईरानी विदेश मंत्री अराघची ने नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ईरान से संबंधित किसी भी मुद्दे का कोई सैन्य समाधान नहीं है। हम होर्मुज से सभी जहाजों को गुजरने देने के लिए तैयार हैं।

ईरान के विदेश मंत्री अघारची- India TV Hindi
ईरान के विदेश मंत्री अघारची Image Source : FILE PHOTO

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भारत यात्रा के दौरान बड़ी बात कही है, उन्होंने कहा, " ईरान ने कभी परमाणु हथियार नहीं चाहे, होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थिति इस समय बहुत जटिल है। बातचीत के जरिए समझौते के अलावा कोई और समाधान नहीं हो सकता। हम होर्मुज जलडमरूमध्य से सभी जहाजों को सुरक्षित निकालने में मदद करने के लिए तैयार हैं। होर्मुज की स्थिति को सुधारने के लिए चीन जो भी कदम उठाएगा, उसका स्वागत होगा। ईरान कूटनीति को मौका देने के लिए युद्धविराम को बरकरार रखने की कोशिश कर रहा था।


हम भारत की रचनात्मक भूमिका का स्वागत करेंगे

ईरानी विदेश मंत्री अराघची ने नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ईरान से संबंधित किसी भी मुद्दे का कोई सैन्य समाधान नहीं है, पाकिस्तान द्वारा की गई मध्यस्थता अभी तक विफल नहीं हुई है। ईरान के पास अमेरिका पर भरोसा न करने के सभी कारण हैं; अमेरिकियों के पास ईरान पर भरोसा करने के सभी कारण हैं। पश्चिम एशिया संकट पर ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची का कहना है कि हम भारत की किसी भी रचनात्मक भूमिका का स्वागत करेंगे। अराघची ने कहा, जैसा कि मैंने कहा, होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थिति इस समय बहुत जटिल है और हम जहाजों को सुरक्षित रूप से गुजरने में मदद करने की कोशिश कर रहे हैं। आक्रामकता की यह कार्रवाई पूरी तरह समाप्त होने के बाद सब कुछ सामान्य हो जाएगा।”

अराघची ने भारत की भूमिका के बारे में क्या कहा

प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा, “कल मेरी प्रधानमंत्री मोदी से संक्षिप्त और अच्छी बातचीत हुई और आज विदेश मंत्री जयशंकर से लंबी बैठक हुई। हमने होर्मुज जलडमरूमध्य और फारस की खाड़ी क्षेत्र की स्थिति समेत लगभग सभी मुद्दों पर चर्चा की। मुझे कहना होगा कि हम दोनों के विचार लगभग एक जैसे हैं और इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में हमारी चिंताएं और हित भी समान हैं। इसलिए, हम अपने भारतीय सहयोगियों के साथ समन्वय जारी रखेंगे।

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